उत्पाद विवरण
मानव जीवन दिग्दर्शिका
हिन्दी प्रीमियम हार्डकवर संस्करण
कुछ प्रश्न ऐसे होते हैं जो जीवनभर हमारे साथ चलते हैं। मैं कौन हूँ? मैं जैसा सोचता, महसूस करता और व्यवहार करता हूँ, उसके पीछे क्या कारण हैं?
क्या विज्ञान और अध्यात्म एक ही सत्य को अलग-अलग दृष्टिकोणों से समझने का प्रयास करते हैं? मानव जीवन दिग्दर्शिका इन्हीं प्रश्नों की खोज की एक क्रमबद्ध यात्रा है। ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और जीवन के विकास से प्रारम्भ होकर यह पुस्तक मानव शरीर, मन, ऊर्जा तंत्र, कर्म, चेतना और आत्मबोध तक के विषयों को विज्ञान, मनोविज्ञान, दर्शन, धर्म, योग और अध्यात्म के समन्वित दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है।
70 से अधिक मौलिक चित्रों, सरल भाषा और तार्किक क्रम के साथ यह पुस्तक जटिल विषयों को सहज बनाती है तथा पाठकों को किसी निष्कर्ष को स्वीकार करने के बजाय स्वयं निरीक्षण, चिंतन और अनुभव के माध्यम से समझ विकसित करने के लिए प्रेरित करती है। हार्डकवर संस्करण विशेष रूप से उन पाठकों के लिए है जो ऐसी पुस्तकों को अपने निजी संग्रह का हिस्सा बनाना चाहते हैं और समय-समय पर पुनः पढ़कर नए दृष्टिकोण प्राप्त करना चाहते हैं।
इस पुस्तक में आप क्या जानेंगे?
- ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति से मानव चेतना के विकास तक की एक क्रमबद्ध यात्रा।
- शरीर, मन, ऊर्जा तंत्र, कर्म, संस्कार और चेतना की व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक समझ।
- योग, ध्यान, धर्म, दर्शन और आध्यात्मिक परम्पराओं के गहरे अर्थ।
- योग, ध्यान, धर्म, दर्शन और आध्यात्मिक परम्पराओं के गहरे अर्थ।
- सा चिंतन जो आपको अंधविश्वास नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण, प्रश्न और अनुभव के माध्यम से अपनी समझ विकसित करने के लिए प्रेरित करे।
हार्डकवर संस्करण की विशेषताएं
हार्डकवर संस्करण उन पाठकों के लिए है जो पुस्तकों को केवल पढ़ते नहीं, बल्कि उन्हें जीवनभर अपने साथ रखते हैं। यह संस्करण व्यक्तिगत संग्रह, उपहार तथा बार-बार अध्ययन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।
पुस्तक विवरण
| प्रारूप | प्रीमियम हार्डकवर |
| लेखक | विरल चावला |
| भाषा | हिन्दी |
| पृष्ठ संख्या | 419 पृष्ठ |
| आकार | 6 × 9 इंच |
| बाइंडिंग | केस बाउंड हार्डकवर |
| चित्र एवं आरेख | मौलिक शैक्षणिक चित्रों एवं व्याख्यात्मक आरेखों सहित |
| श्रेणी | नॉन-फिक्शन | व्यक्तित्व विकास | मनोविज्ञान | योग | अध्यात्म | दर्शन |
लेखक के बारे में
विरल चावला एक लेखक, योग शिक्षाविद्, उद्यमी और आजीवन जिज्ञासु विद्यार्थी हैं। वे योग स्कूल ऑफ भारत के संस्थापक तथा क्राफ्टअर्थ के सृजनकर्ता हैं। उनका कार्य विज्ञान, मनोविज्ञान, योग, अध्यात्म और जागरूक जीवनशैली के संगम का अन्वेषण करना है। लेखन, शिक्षण और अपने विविध रचनात्मक उपक्रमों के माध्यम से वे शाश्वत ज्ञान को सरल, व्यावहारिक और आधुनिक जीवन के लिए प्रासंगिक बनाने का प्रयास करते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग स्वयं को, जीवन को और अपने वास्तविक स्वरूप को गहराई से समझ सकें।




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